Bio-Fertilizer

A bio fertilizer (also bio-fertilizer) is a substance which contains living microorganisms which, when applied to seeds, plant surfaces, or soil, colonize the rhizosphere or the interior of the plant and promotes growth by increasing the supply or availability of primary nutrients to the host plant.The widest range of premium Organic Fertilizer products



What are biofertilizers give examples?
There are five biofertilizers viz. ... Rhizobium, Azotobacter, Azospirillum and blue green algae(BGA) have been traditionally used as Biofertilizers. Rhizobiuminoculant is used for leguminous crops such as pulses. Azotobacter can be used with crops like wheat, maize, mustard, cotton, potato and other vegetable crops.

What is biofertilizers and biopesticides?
Biofertilizers and biopesticides are important areas to fulfill the challenges in a sustainable way. Biopesticides are derived from natural materials such as animals, plants, bacteria, and certain minerals widely used for controlling insects and disease causing pathogens.

Why cyanobacteria is used as biofertilizers?
More specifically, cyanobacteria fix nitrogen, which is an essential nutrient for supporting plant growth. The cyanobacteria tap the sun's energy captured during photosynthesis to fix nitrogen from the air and turn it into a form which plants can use.

What is the organic fertilizer?
Organic fertilizers are fertilizers derived from animal matter, animal excreta (manure), human excreta, and vegetable matter (e.g. compost and crop residues). Naturally occurring organic fertilizers include animal wastes from meat processing, peat, manure, slurry, and guano.

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Waste_decomposer_culture_bottle in bijnor up
How to use NCOF Waste Decomposer(as Natural Manure,liquid fertilizer,organic pesticides,soil health improver) for quick composting organic waste in zero budget farming (W11484950D)


#जैविक_खेती #वेस्ट_डीकंपोजर से, जानिए तैयार करने का तरीका




#Waste_Decomposer for the Development of #Organic_Farming




राष्‍ट्रीय जैविक केन्‍द्र ने वर्ष 2015 से 'कचरा डीकंपोजर उत्‍पाद का आविष्‍कार किया जिसके पूरे देश में एक आश्‍चर्यजनक सफल परिणाम निकले।

इसका प्रयोग जैविक कचरे से तत्‍काल खाद बनाने के लिए किया जाता है तथा मिट्टी के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार के लिए बढे पेमाने में केंचुए पैदा होते हैं और पौध की बिमारियों को रोकने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

इसको देशी गाय के गोबर से सूक्ष्‍म जैविक जिवाणु निकाल कर बनाया गया है। आज की तिथि में वेस्‍ट डीकंपोजर की 30 ग्राम की मात्रा को पैक्ड बोतल में बेचा जाता है। जिसकी लागत 20 रु. प्रति बोतल आती है।

इसका निर्माण राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र, गाजियाबाद में होता है। 8 क्षेत्रीय जैविक खेती केन्द्र के माध्यम से देश के किसानों एवं उद्दमियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

देश के 1 करोड किसानों के पास अभी तक पहुंचा है। 90 लाख से ज्यादा किसान इससे लाभान्वित हुए हैं। इस वेस्‍ट डीकंपोजर को आईसीएआर द्वारा सत्‍यापित किया गया है।




(कचड़ा) वेस्ट डीकंपोजर तैयार करने का तरीका-




2 किलो गुड़ को 200 लीटर पानी वाले प्‍लास्‍टिक के ड्रम में मिलाए।

अब एक बोतल वेस्‍ट डीकंपोजर की ले और उसे गुड़ के गोल वाले प्‍लास्‍टिक ड्रम में मिला दें।

ड्रम में सही ढ़ंग से वेस्‍ट डीकंपोजर के वितरण के लिए लकड़ी के एक ढ़ंडे से इसे हिलाये और व्‍यवस्‍थित ढंग से मिलाएं।

इस ड्रम को पेपर या कार्ड बोर्ड से ढक दें और प्रत्‍येक दिन एक या दो बार इसको पुन: मिलाएं।

7 दिनों के बाद ड्रम का गोल क्रीमी हो जाएगा यानि एक बोतल से 200 लीटर बेस्ट डी कंपोजर घोल तैयार हो जाता है।


नोट:1 - किसान उपरोक्‍तानुसार 200 लीटर तैयार वेस्‍ट डीकंपोजर घोल से 20 लीटर लेकर 2 किलो गुड़ और 200 लिटर पानी के साथ एक ड्रम में दोबारा घोल बना सकते हैं।

नोट:2 - इस वेस्ट डीकंपोजर घोल से किसान बड़े पैमाने पर बार-बार घोल जीवन भर बना सकते हैं।




उपयोग-




वेस्‍ट डीकंपोजर का उपयोग 1000 लीटर प्रति एकड़ किया जाता है जिससे सभी प्रकार की मिट्टी (क्षारीय एवं अम्लीय) के रासायनिक एवं भौतिक गुणों में इस प्रकार के अनुप्रयोग के 21 दिनों के भीतर सुधार आने लगता है तथा इससे 6 माह के भीतर एक एकड़ भूमि में 4 लाख से अधिक मृदा में केचुएं पैदा हो जाते हैं।

कृषि कचरा, जानवरों का मल, किचन का कचरा तथा शहरों का कचरा जैसे सभी नाशवान जैविक सामग्री 40 दिनों के भीतर गल कर जैविक खाद बन जाती है।

वेस्‍ट डीकंपोजर से बीजों का उपचार करने पर बीजों का 98 प्रतिशत मामलों में शीघ्र और एक सामान अंकुरण की घटनाएं देखने में आया हैं तथा इससे अंकुरण से पहले बीजों को संरक्षण प्रदान होता है।

वेस्‍ट डीकंपोजर का पौधों पर छिड़काव करने से विभिन्‍न फसलों में सभी प्रकार की बिमारियों पर प्रभावी ढ़ग से रोक लगती है।

वेस्‍ट डीकंपोज का उपयोग करके किसान बिना रसायन उर्वरक व कीटनाशक के फसल उगा सकते हैं। इससे यूरिया, डीएपी या एमओपी की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

वेस्‍ट डीकंपोजर का प्रयोग करने से सभी प्रकार की कीटनाशी/फफूंदनाशी और नाशी जीव दवाईयों का 90 प्रतिशत तक उपयोग कम हो जाता है क्‍योंकि यह जड़ों की बिमारियों और तनों की बिमारियों को नियंत्रित करता है।

#वेस्ट_डी_कम्पोजर की शीशी से किसानों का कितना फायदा-




अगर आप से कहा जाए कि सिर्फ 20 रुपए खर्च करके आप अपने घर में ऐसी व्यवस्था शुरू सकते हैं, जिससे हर साल आपको अपनी खेती लायक पर्याप्त खाद मिल सकती है। उस जमीन में जहां कई तरह के उर्वरक डालने पर फसल नहीं होती वहां फसलें पैदा होनी लगेंगी तो शायद आप एक बार यकीन न करें, लेकिन ये सच है।

"देश के करीब 20 लाख किसानों को इसका फायदा मिल चुका है। जल्द ही ये संख्या 20 करोड़ तक पहुंचानी हैं। वेस्ट वेस्ट डीकम्पोजर की खास बात है इसकी एक शीशी ही पूरे गांव के किसानों की समस्याओं का समाधान कर सकती है। इससे न सिर्फ तेजी से खाद बनती है, जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है, बल्कि कई मिट्टी जमीन बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है।" डॉ. कृष्ण चंद्र कृषि कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के जैविक खेती परियोजना को लेकर शुरू किए गए विभाग राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र, गाजियाबाद के निदेशक और वेस्ट वेस्ट डीकम्पोजर की खोज करने वाले प्रधान वैज्ञानिक हैं।

"वेस्ट डीकम्पोजर को गाय के गोबर से खोजा गया है। इसमें सूक्ष्म जीवाणु हैं, जो फसल अवशेष, गोबर, जैव कचरे को खाते हैं और तेजी से बढ़ोतरी करते हैं, जिससे जहां ये डाले जाते हैं एक श्रृंखला तैयार हो जाती है, जो कुछ ही दिनों में गोबर और कचरे को सड़ाकर खाद बना देती है, जमीन में डालते हैं, मिट्टी में मौजूद हानिकारक, बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं की संख्या को नियंत्रित करता है।' केंद्र के सहायक निदेशक डॉ. जगत सिंह बताते हैं।

वेस्ट डीकम्पोजर को किसानों के बहुउपयोगी बताते हुए डॉ. जगत वैज्ञानिक तर्क देते हैं, "ये दही में जामन की तरह काम करता है। एक बोतल से एक ड्रम और एक ड्रम से 100 ड्रम बना सकते हैं। दरअसल सूक्ष्मजीव सेल्लुलोज खाकर बढ़ते हैं, और फिर वो पोषक तत्व छोड़ते हैं जो जमीन के लिए उपयोगी हैं। मिट्टी में पूरा खेल कार्बन तत्वों और पीएच का होता है। ज्यादा फर्टीलाइजर डालने से पीएच बढ़ता जाता है और कार्बन तत्व (जीवाश्म) कम होते जाते हैं, बाद में वो जमीन उर्वरक डालने पर भी फसल नहीं उगाती क्योंकि वो बंजर जैसी हो जाती है।' अपनी बात को सरल करते हुए वो बताते हैं, "पहले किसान और खेती का रिश्ता बहुत मजबूत था। लेकिन अब उसका सिर्फ दोहन हो रहा है। किसान लगातार फर्टीलाइजर और पेस्टीसाइड वीडीसाइड डालता जा रहा है, उससे जमीन के अंदर इन तत्वों की मात्रा बढ़ गई है। उर्वरकों के तत्व पत्थर जैसे एकट्ठा हो गए हैं। क्योंकि उन्हें फसल-पौधों के उपयोग लायक बनाने वाले जीवाणु जमीन में नहीं बचे हैं।"

वेस्ट डीकम्पोजर एक तो ऐसे तत्व फसल अवशेषों से खुद लेकर बढ़ाता है, दूसरा जो जमीन में उर्वरक के पोषक तत्व (लोहा, बोरान, कार्बन आदि) पड़े हैं उन्हें घोलकर पौधे के लायक बनाते हैं। क्योंकि जिस जमीन में जीवाश्वम नहीं होंगे वो फसल बहुत दिनों तक उर्वरक के सहारे उत्पादन नहीं दे सकती। इसलिए किसानों को चाहिए हर हाल में खेत में गोबर, फसल अवशेष आदि आदि जरूर डाले।" पिछले हफ्ते केंद्रीय कृषि कल्याण मंत्री और राधामोहन सिंह ने इस केंद्र का दौरा कर वैज्ञानिकों से ज्यादा से ज्यादा वेस्ट डीकम्पोस्ट बनाने की बात कही थी। केंद्र के मुताबिक इसमे किए गए दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है, कई सरकारी संस्थाओं ने ही इस पर रिसर्च की है। वेस्ट डीकम्पोजर को सीधे खेत में न उपयोग करके पहले इसका कल्चर बनाया जाता है। कुछ ग्राम की इस शीशी में मौजूद तरल पदार्थ को 200 लीटर पाने से भरे एक ड्रम में डाला जाता है, जिसमें दो किलो गुड़ डाला जाता है। रोजाना इसे दो बार लक़ड़ी से मिलाना पड़ता है। पांच-7 जिनों में घोल में मौजूद ऊपरी सतह पर झाग बन जाए तो उपयोग लायक हो जाता है।

डॉ. जगत बताते हैं, "एक शीशी से 200 लीटर तरल खाद तैयार होती है, इसे खेत में छिड़काव कर सकते हैं। गोबर-कचरे पर डालकर उसे खाद बना सकते हैं। इससे बीज का शोधन कर सकते हैं। अगर फसल में फफूंद जैसे रोग लगे हैं तो भी उस पर छिड़काव किया जा सकता है। फिलहाल सही मात्रा में छिड़काव, सिंचाई के साथ प्रयोग से कोई नुकसान की ख़बर नहीं मिली है हमें।" गाजियाबाद के इस सेंटर से रोजाना करीब 400 बोतलें देश भर के किसानों को भेजी जाती हैं। इसके साथ कई किसान खुद वहां पहुंचते हैं। डॉ. जगत के पास 50 फोन आए होंगे, जबकि 2 दर्जन से ज्यादा अलग-अलग राज्यों से यहां मिलने पहुंचे थे। यहीं पर मिले गुजरात के मूल निवासी और गाजियाबाद मे रहकर गोशालों पर काम करने वाले रमेश पांडया इसका अलग उपयोग बताते हैं।

"आप मुझे पशु प्रेमी कह सकते हैं, मेरी खुद की गोशाला है और देश की 10 हजार ज्यादा गोशालाओं से जुड़ा हूं। इनमें से हजारों शहरों में हैं। गोबर हमारे लिए बड़ी समस्या थी, इतनी गंदगी हो जाती है कि आसपास के लोग परेशान हो जाते हैं, इसका उपाय मुझे वेस्ट डीकम्पोजर में मिला। अब वो गोबर खाद बनता है, और गोशालोँ की आमदनी बढ़ा रहा है।' पांडया के मुताबिक वो गुजरात में शिविर लगाकर किसानों को ये कल्चर बंटवा रहे हैं। किसी गांव के एक किसान को दिया जाता हो वो ज्यादा कल्चर बनाकर दूसरे किसानों को देता है।

बुलंदशहर में रहने वाले जैविक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण देने वाले भरत भूषण त्यागी भी इसे जमीन के लिए उपयोगी बताते हैं। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मान लेने के बाद वो बताते हैं, "वेस्ट डीकम्पोजर जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है, मिट्टी को नया जीवन देता है, इसमें कोई शक नहीं।'

राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के मुताबिक खेती से फायदे के लिए किसान ये काम करें-



देसी खादों का इस्तेमाल करता रहे, ताकि जमीन में जीवाश्म (कार्बन तत्व) कम न हों। जिस जमीन में कार्बन तत्व .5 होते हैं वो जमीन उपजाउ होती है और जिसमें ये तत्व 0.75 होते हैं वो जैविक खेती योग्य हो जाती है। मिट्टी की जांच जरुर कराएं और जमीन में जिस तत्व की कमी हो, सिर्फ वो ही तत्व (फर्टीलाइजर) के रुप में डालें। यानि जिनती जरूरत है। हरी खादों (देसी खाद, तरल खाद या किसी रुप में) में जरुर डालें। जैसे ढैंचा आदि। मिश्रित खेती करें और फसल चक्र अपनाएं। खेत में कुछ पौधे धरातल पर तो कुछ ऊंचाई वाले हिस्से पर हों ऐसी फसलें ले, इससे खेत में लगी फसलें प्रकाश संस्लेषण (फोटो सिंथेसिस) का पूरा उपयोग कर जमीन में पोषक तत्व खुद बढ़ा लेंगी। अपनी खेतों में दलहनी फसलों को तरहीज हों। फसल चक्र के रूप में खेत के किसी न किसी भाग में क्रम के अऩुसार अरहर, चना जैसी फसलें बोएं।

क्या न करें-



1.किसी भी कीमत पर फसल के अवशेष न जलाएं। खेत में फसल जलाने से न जैव कचरा खत्म हो जाता है बल्कि खेत की उपजाऊ परत भी जल जाती है, जिससे सूक्ष्म जीव मर जाते हैं।
2.बिना टेस्टिंग उर्वरक का इस्तेमाल न करें।
3.कीटनाशी और फफूंदनाशी का अंधाधुंध उपयोग न करें।
4.फसलों को ज्यादा पानी न दें, सिर्फ नमी बनाए रखें।



Waste Decomposer Culture (Ncof)


WASTE DECOMPOSER ORGANIC FARMING CULTURE



1. डॉ। कृष्णा चंद्र निदेशक, भारत सरकार कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, जैविक खेती के राष्ट्रीय केंद्र, गाजियाबाद अपशिष्ट विघटनकारी जैविक फसल .

2. तरल डी-कंपोज़र के साथ कचरे की तैयारी से त्वरित खाद इन-सिटू कम्पोस्टिंग पेस्ट और रोग नियंत्रण बीज उपचार मृदा स्वास्थ्य का पुनरुद्धार

3. सरल और विश्वसनीय ➢ उपयोग करने के लिए तैयार (5 दिनों के भीतर) ➢ अधिक शेल्फ-जीवन (3 वर्ष) for सभी फसलों के लिए अनुशंसित • बेहतर फसल प्रतिक्रिया for स्वच्छ भारत आंदोलन के लिए जैविक उर्वरक में जैविक कचरे को परिवर्तित करके एक महान घटक के रूप में कार्य ➢ कम लागत (केवल 20 रुपये प्रति बोतल) ➢ 1000 मीट्रिक टन कार्बनिक उर्वरक किसानों द्वारा प्रति वर्ष 1 बोतल से बनाया जा सकता है कुल 50000 किसानों को पहले से ही एनसीओएफ

4. एक कंटेनर में 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़ मिलाकर अच्छी तरह से हल करें और बोतल खोलें और समाधान में सामग्री डालें और हर दिन अच्छी तरह से हलचल पेपर / गत्ता के साथ कवर कंटेनर 5 दिनों के बाद अपशिष्ट विघटनकारी तैयार हो जाता है

किसानों द्वारा गुणन:

5. त्वरित खाद बनाना • एक बोतल अपशिष्ट विघटनकर्ता को 200 किलो पानी में 2 किलो गूळ मिलाकर अच्छी तरह से हलचल और 7 दिनों के लिए छोड़ दें • कार्बनिक कचरे को एक प्लास्टिक शीट पर परत के रूप में फैलाएं • कार्बनिक पर ऊपर तैयार समाधान के 10 लीटर छिड़कें 01 टन अपशिष्ट की अपशिष्ट परत • कम्पोस्टिंग की संपूर्ण अवधि के दौरान 60% नमी बनाए रखें • 7 दिन के अंतराल पर कंपोस्ट को चालू करें • खाद 45 दिनों के बाद उपयोग के लिए तैयार हो जाता है। खाद का विघटनकारी समाधान सीधे खाद के ढेर पर छिड़क

6. फसल के अवशेषों में सिटू खाद बनाना • एक बोतल अपशिष्ट विघटनकर्ता को 200 किलो पानी में 2 किलोग्राम गूंध मिलाकर अच्छी तरह हलचल और 7 दिनों के लिए छोड़ दें। • सिंचाई के पानी के साथ तरल को मैदान में फसल के अवशेषों के ठूंठों तक बाढ़ कर रखें और इन-सिस्टो कम्पोस्टिंग के लिए 30 दिनों के लिए छोड़ दें।

7. बीज उपचार • 1 बोतल अपशिष्ट विघटनकर्ता को 30 ग्राम गुड़ के साथ अच्छी तरह से मिलाया जाता है • तैयारी का उपयोग 20 किलो बीज के लिए किया जाता है • 30 मिनट के लिए छाया के नीचे उपचारित बीज छोड़ें • 30 मिनट के बाद बीज बोने के लिए तैयार हैं

8. पत्ते स्प्रे द्रव अपशिष्ट decomposer संस्कृति द्रव्यमान गुणा पानी के साथ 1:10 के अनुपात में पतला और कीट और बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए पत्ते स्प्रे के रूप में लागू है।

9. केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह जी किसानों के लिए अपशिष्ट विघटनकारी वितरण कर रहे हैं

10. प्रशिक्षण का आयोजन करके किसानों को प्रौद्योगिकी का प्रसार करना

11. अपशिष्ट विघटनकारी प्रदर्शन कार्यक्रम 50000 किसानों को बेहद लाभ हुआ है

12. किसानों के खेतों में अपशिष्ट विघटनकर्ताओं का आसान द्रव्यमान

13. 45 दिनों में एनसीओएफ में तैयार खाद

14. उपयोग करने के लिए तैयार खाद

15. व्यापार मेले में अपशिष्ट विघटनकर्ता / हमारे कृषि मंत्रियों के बारे में जानने के प्रदर्शन

16. अपशिष्ट विघटनकर्ता जागरूकता और देश भर में आपूर्ति करता है

17. मॉरीशस के आगंतुक

18. नेपाल से आगंतुक

19. अन्य देशों के आगंतुकों में अपशिष्ट विघटनकर्ताओं की लोकप्रियता

National Centre of Organic Farming (NCOF) has developed a waste decomposer culture which is used for quick composting from organic waste, soil health improvement and as plant protection agent. It is a consortium of micro organism extracted from desi cow dung.


The waste decomposer is sold in a bottle of 30 gms costing Rs. 20/- per bottle directly through NCOF and Regional Organic Farming Centres (RCOF) to farmers. The waste decomposer is also validated by ICAR. A single bottle decomposes bio-waste of more than 10000 metric tons just in 30 days.


How to prepare waste decomposer solution from the started culture?




Take 2 kg jaggery and mixed it in a plastic drum containing 200 liters water.

Now take 1 bottle of waste decomposer and pour all its contents in a plastic drum containing jaggery solution.

Avoid direct contact of contents with hands.

Mix it properly with a wooden stick for uniform distribution of waste decomposer in a drum.

Cover the drum with a paper or cardboard and stir it every day once or twice.

After 5 days the solution of drum turns creamy.


Farmers could prepare the waste decomposer solution again and again from the above formed solution. For this, 20 liter of waste decomposer solution is added to a drum with 2 kg of jaggery and 20 liter water is added. Farmers can prepare continuously this solution from this waste decomposer for lifetime.


How to use?Composting




Spread 1 ton of compost as layer on a plastic sheet placed under shade

Sprinkle 20 liter of the above prepared solution over the compost layer

Spread one more layer of compost above the existing layer

Sprinkle 20 liter of the solution over the compost layer

Use the solution for 10 compost layers

Maintain 60% moisture during entire period of composting

Turn over the compost at 7 day interval The compost is ready to use after 30 days


Foliar Spray

Spray the preparation on the standing crop for 4 times at 10 days interval




Drip irrigation


Mix the preparation in water required for 1 acre and use it for drip irrigation.




In-Situ Composting of Crop Residue


Spray the preparation on the post-harvest stalks of crop plants of 1 acre land and leave it for decomposition.




Seed Treatment

Wear gloves

Content of 1 bottle is thoroughly mixed with 30g jaggery and used to treat 20 kg seeds

Leave the treated seeds under shade for 30 minutes

After 30 min. the seeds are ready for sowing.

For regular disease control, spray the preparation on standing crop once in a month.




Uses




Waste decomposer application 1000 liter per acre changes biological and physical properties of all type of soil (acidic, and alkaline) within 21 days of application and it helps to generate earthworm population in the soil upto 4 lakh in 1 acre land in just six months.

₹20  Inc Tax
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